कानून को तो ऐसा होना चाहिए
जी रही जनता हो हरदम आस पर,
न्याय व्यवस्था न धरी हो ताक पर।
आतंक का न ही कोई साम्राज्य हो,
कानून का पालन तो होना चाहिए।।
साम, दाम, दण्ड में न भेद हो,
न किसी के मन में कोई खेद हो।
लोग डरते हों जहां कानून से,
कानून हो तो ऐसा होना चाहिए।।
जनता का लालन भी होना चाहिए,
कानून का पालन भी होना चाहिए।
खेल-खेल में सभी संदेश हों,
निर्देश हो तो ऐसा होना चाहिए।।
भय सहित जिसके प्रति अनुराग हो।
लोकतंत्र में सभी का भाग हो।
चेतना भूले से भी न लुप्त हो,
न्याय को तो ऐसा होना चाहिए।।
एक कुक्कुर तक को न्याय है मिला,
जन-गण-मन का हिरदे है खिला।
जिस तरह श्री राम जी ने है किया।
न्याय हो तो ऐसा होना चाहिए।।
चाहिए ऐसा जहां में राज हो,
पूर्णतः दिखता जहां स्वराज हो।
अराजकता लेश भी न शेष हो,
सुराज हो तो ऐसा होना चाहिए।।
कर्त्तव्य हावी हों जहां अधिकार पर,
व्यर्थ का न बोझ हो सरकार पर।
राष्ट्र का चिन्तन हो नस-नस में बसा,
हर नागरिक को ऐसा होना चाहिए।।
रक्त रंजित न कोई भी छोर हो,
रौशिनी ही रौशनी चहुं ओर हो।
तम सदा कोने में ही दुबका रहे,
‘ज्योति’ को तो ऐसा होना चाहिए।।



















