वैराग्य वाणी
वैराग्य वाणीराम नाम का जगत में, है अनुपम प्रताप।जाके बल ते मिटत हैं, पाप, ताप, संताप।।निर्गुण की महिमा अमित, सगुण रूप भयो आप।भगतन हित खुद देह धर, जग से मिटावें पाप।। जो जाणै सो पाव है, प्रभु की कृपा अपार। सारे जगत का है वही, एक मूल आधार।।जो आए सो जाएंगे, कौन … Read More



















