भजन
रहमत की नजर हो तो, मेरी किस्मत खुल जाए।
दुनिया की मनचाही, हर वस्तु है मिल जाए।।
है खिली हुई दुनिया, सारी है मतलब की।
करते मीठी बातें, सब अपने मतलब की।
मतलब की दुनिया से, मुझे मुक्ति मिल जाए।।
जब भी देखा जिसको, बेगाना ही पाया।
अपना समझा जिसको, अंजाना ही पाया।
तुम अपना लो मुझको, मुझे मंजिल मिल जाए।।
जग दीवाना सारा, मुझे लगता है कारा।
जिसमें फंसकर मैंने, तुझको है विस्मारा।।
अब जले ज्ञान ‘ज्योति’, अंधियारा मिट जाए।।



















