साईं तेरा नाम
सांई तेरा नाम, बड़ा सुखदाई।।
जिसने ध्याया उसकी, बिगड़ी बनाई।।
तेरी माया कोई न जाने,
जो जाने है सोई माने।
तेरी मूरत, कण-कण मांहि समाई।।
जो चलकर तेरे द्वारे आवे,
मन की मुरादे सारी पावे।
जीवन में कष्ट न, पड़ें दिखाई।।
शिर्डी में जा डेरा लगाया,
द्वारिका माई को तुमने बसाया।
सोने की मूरत, गई है बनाई।।
नाम रूप में बसते तुम हो,
हर इक रुप में दिखते तुम हो।
तुम्हरी महिमा, कही न जाई।।
हिंदू मुस्लिम, सिख, इसाई,
सब मिल पूजें तुमको साईं।
हर घर ने तेरी ‘ज्योति’ जलाई।।



















