महाराणा प्रताप

हल्दीघाटी के महावीर, शूरों के अप्रतिम शूरवीर।वायु से वेगवान थे तुम गति जैसे कोई प्रलय का तीर।। जो ठहर सके समरांगण में, ऐसा ना मिला सूर कोई।जब थे तुमने खोले लोचन, अवनी निर्भय हो शांत सोई।तुम्हारी छाती बेध सके, ऐसा ना बना था कोई तीर।हल्दीघाटी के महावीर, शूरों के अप्रतिम … Read More