संदोह

अल्पता से स्वल्पता तक आ गया हूं।अल्पना से कल्पना तन छा गया हूं।अब बीतते हैं रात दिन सब रीते रीते।हर सांस में कुछ तरह समा गया हूं।। झाड़ियों को पा मिला सुकून मुझको।नागफनियों ने डसा था खूब मुझको। हैअब नहीं शिकायत मुझे किसी बात की है।रक्त से अपनों ने नहलाया … Read More

भारत के सैनिक

जो आग लगा सकते हैं पर, फिर भी मुस्काए जाते हैं। यह भारत के सैनिक हैं जो निज धर्म निभाएं जाते हैं।। उनसे भी भेद नहीं माना, उनको है सदा अपना जाना। जो संगीनों के साए में, आतंक मचाए जाते हैं।।   जो शान तिरंगा फूँक रहे और मानवता पर थूक … Read More